नई कहानी जादू
मेरा नाम सागर है और मैं दिल्ली में रहता हूं अभी कुछ महीने पहले ही मेरी दोस्ती जय से हुई वह लोग भी दिल्ली में ही रहते थे पर वह पीछे से असम साइड के थे हमारी जोड़ी काफी अच्छी लगती थी हम दोनों काफी खुश रह रहे थे लोग हमे धर्म -वीर की जोड़ी कहते थे। मुझे घर के काम करने का शोक था। मै ऑफिस के साथ घर के काम भी कर लिया करता था। स में कपड़े धोना ,किचन का सारा काम ,झाड़ू पोछा ,डस्टिंग बूटपालिश आदि शामिल था। जब भी मै जय की मनपसंद सब्जी बनता तो वो मेरे हाथ चुम लेता। जय ने कई बार मेरी तारीफ़ की। जय ने 10 दिन की ऑफिस से छुट्टी ली और मुझ से कहाँ मै कुछ दिन के लिए असम जा रहा हूँ। मेरे पिताजी का पत्र आया है कोई जरुरी काम है मै अपने घर जारहा
हूँ जल्दी आऊँगा। ये कह कर वो चला गया। जय को अब मै बहुत याद करने लगा था। उस की कमी मुझे रूम में खलती थी। तो मैं ड्रिंक करने लगा अब मैं रोज ड्रिंक करके ही घर आने लगा था और इन सब से मेरी तो मानसिक हालत खराब होने लगी। काफी महीने गुजर गए पर मेरी पीने की आदत नहीं छुट्टी मैंने सोचा ऐसे काम नहीं चलेगा। क्यों न मै भी असम चला जाऊ। कम से कम मै जय से तो मिलुंगा तो उस से बात कर के उस का हाल चाल पूछ लुगा। फिर मैंने भी कम्पनी से ३० दिन की छूटी ली। और निकल पड़ा असम की तरफ। मेरे पास जय का एड्रेस था। ४ दिन की यात्रा के बाद मै असम के स्टेशन गोलाघाट पंहुचा जहाँ मेने पास लिया । वहाँ से मैंने एक टैक्सी की और जय के घर की तरफ निकल पड़ा। उन का घर दूर था पर मै पहुंच गया गोलाघाट काफी मशहूर जगह थी। उस के आसपास कई जादूगरों की बस्ती और गाँव थे।
हमारे यहां दिल्ली से बहुत कुछ अलग था वहां बिल्कुल अलग ही टाइप का माहौल था यहां लगभग हर घर में एक तांत्रिक होता ही है
मैंने पूछा कि तुम्हारे घर में भी कोई तांत्रिक है तो उसने कहा हां क्यों नहीं हमारे गांव में हर घर में एक तांत्रिक होता है और अपने घर में मुझे ही यह सब करना आता है पर मैं एक पढ़ा -लिखा लड़का भी हूं इसलिए मैं यह सब छोड़ चुका हूं आता मुझे सब कुछ है। घर में मेरे चाचा भी है उन्हें भी सब कुछ आता है। चलो तुम्हे उन से मिलवाता हूँ। ये मेरे चाचा है श्याम और ये सागर है मेरा पक्का दोस्त। ये दिल्ही से यहाँ मुझ से मिलने आया है। हेल्लो सागर मै श्याम और सुनाओ दिल्ली कैसी है। ठीक है मैंने सुना है कि यहां हर घर में एक जादूगर है। श्याम - हां ठीक सुना है। सागर-वैसे जादूगर लोग क्या करते है। श्याम -जादूगर किसी का भी रूप बदल सकते है। चाहे वो दुनिया से बचने के लिए खुद का हो या जब उन्हें कोई पसंद आ जाये तो उन का भी रूप बदल सकते है। और भी कई काम है जो वो कर सकते है। जैसे किसी को गायब करना हो या हवा में या पानी पर चलना हो आदि। सागर ने पुछा क्या वो किस को लड़का या लड़की के रूप में बदल सकते हैं। श्याम - हाँ। सागर - मै एक पढ़ा लिखा लड़का हूँ मै ये सब नहीं मानता। पर मेरा दिल इसे मानने को कहता पता नहीं ये सच है या नहीं। श्याम - कोई बात नहीं कल बात करेंगे। तुम अभी अभी आये हो। घर के बाकी लोगो से मिल्लो।
जय ने अपने माता पिता से मुझे मिलवाया ,माँ पिताजी ये सागर है दिल्ही से। ये चाचा जी से मिल चुका है। ओह सागर तुम श्याम से मिलचुके हो चलो अच्छा है। जय की माँ का नाम रजनी था और पिता का नाम संतोष था।
रजनी जी मुझ से काफी क्लोज हो कर बात कर रही थी। रजनी जी बोली और बताओ पढाई के अल्वा क्या काम करते हो। जी मुझे खाना बनाने का शौक है। जब मै घर में अकेला होता हूँ। तो नए नए पकवान बनाना सीखता हूँ। घर में कोई है नहीं तो कपड़े भी खुद ही धोने पड़ते हैं और साफसफाई भी करनी पड़ती है।
रजनी जी - श्याम तुम्हे कैसे लगे। मैं जी पहली मुलाकात में तो अच्छे ही लगे। मेरी और श्याम जी की सामान्य बात हुई जो की कुछ ख़ास नहीं थी।
रजनी जी ने मुझे अपनी कुछ सहलियो से मिलवाया बोली ये सागर है जय का दोस्त ख़ास तोर पर जय से मिलने आया है। सभी महिलाये मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी और एक अच्छा वातावरण था। उन के साथ बात करना मुझे भी अच्छा लग रहा था। कुछ समय बाद संतोष जी ने भी मुझे अपने पास बुलाया और अपने परिवार वालो और दोस्तों से मिलवाया।
उस दिन मै काफी थक गया था। सब से मिल कर और रात को कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।
अगली सुबह कुछ ख़ास थी। सब वहा कुछ तैयारी कर रहे थे। मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि वहाँ क्या हो रहा है। मैंने जय से पूछा वो बोला कि चाचा की शादी है। तुम इस शुभ अवसर पर आये हो आज बारात जाएगी। मैंने सोचा चलो मैं भी बारात में साथ चलुगा। जय ने बोला तुम हमारे साथ लड़की के घर चलो गे मैंने हां करदी। पर जब हम लड़की के घर पहुंचे वहाँ गड़बड़ होगई। उस लड़की ने जय के चाचा को छोड़ कर किसी और से पहले ही शादी कर ली थी। अब श्याम वही रुक गया। बोला मै यहां से बिना शादी के गया सब मजाक बनायेगे मेरा। इस से अच्छा है मै मर जाऊ। सब ने काफी समझाया वो नहीं माना। मैंने कहाँ आप क्या चाहते है। श्याम ने कहा मैं यहाँ से शादी कर के ही जाऊँगा। वहाँ खुद के परिवार में तो शादी नहीं हो सकती थीं। मै ही बाहर का था। जय ने मेरे से कहा की सागर अगर तुम चाहो तो ये सब सही हो सकता है। क्यों ना तुम लड़की बन कर मेरे चाचा से शादी कर लो। मैंने कहा मै एक लड़का हूँ। मै कैसे कर सकता हूँ। तुम्हे लड़की मै अपने जादू से बना दुँगा। मैंने मजाक समझा और बोलै ठीक है अगर तुम मुझे अपने जादू से लड़की बना देते हो तो मै तुम्हारे चाचा से शादी कर लुँगा। जय ने फिर पता नहीं कोनसा मंतर पढ़ा मेरा शरीर एक खूबसूरत लड़की का बन गया। कपडे वही थे, पर शरीर लड़की का था ।
मैंने कहा ये कैसे किया। जय ने कहा जादू से तुम्हे याद है ना कि मैंने कहाँ था कि मै एक जादूगर हूँ और मेरे चाचा भी जादूगर हैं। इस से पहले मै कुछ कह पाता वहा रजनी जी आगई। बोली सागर अब हमारी इज्जत तुम्हारे हाथ है। तुम चाहो तो हमे बचा सकते हो। मैंने हार कर हां कह दिया। मेरा पूरा मेकप किया गया। मुझे शादी का जोड़ा पहनाया गया। और पूरी तरह से दुल्हन बनाया गया। फिर मेरी शादी श्याम से होगई। अब मै श्याम की पत्नी और जय की चाची बन गई थी। बारात मुझे वहा से एक दुल्हन के रूप में डोली में बिठा के लाई। घर में अब मै रजनी की देवरानी थी और श्याम की पत्नी।
वहा के कई रीत रिवाज थे। सब से पहले मेरा नाम बदल कर विद्या कर दिया। फिर मुझ से चंद्र पूजा करवाई और एक नारियल पूजा के तोर पर चढ़वाया।
वहा के कई रीत रिवाज थे। सब से पहले मेरा नाम बदल कर विद्या कर दिया। फिर मुझ से चंद्र पूजा करवाई और एक नारियल पूजा के तोर पर चढ़वाया। पहली रात्रि काल रात्रि होने के कारण सुहागरात अगले दिन के लिए बढ़ गई थी। रात को मै रजनी के साथ सोने का मौका मिला। रजनी जो अब मेरी जेठानी थी। रजनी बोली श्याम बहुत ही अच्छा है। उसे खूब प्यार करना और अच्छे से उस का घर संभालना। अब तुम हमारे घर की बहू हो। आदमी को रिझाना भी तुम्हे आना चाहिए। मैंने कहाँ मुझे तो रिजहाना नहीं आता। रजनी बोली वो मै सीखा दूगी। मैंने रजनी से पूछा की सुहागरात को क्याक्या होता है। कल रात तुम को खुद पता चल जाए गा। वैसे भी पति पत्नी का रिस्ता एक दूसरे के भरोसे का होता है। तुम ने जो हमारे परिवार के लिए किया है वो हमारे लिए बहुत बड़ी बात है। चलो अब सो जाओ सुबह जल्दी उठना है।
अगले दिन सुबह जल्दी जाग कर सब के लिए खाना बनाना और कुछ मीठा बनाना रसोई का सारा काम किया।
अब मै विद्या थी। जय की चाची और उस घर की छोटी बहू। मुझे नहीं पता था कि सुहागरात को क्या होता है। और लड़की और लड़के का क्या सम्बन्ध होता है। रात में मुझे एक कमरे में लेजाया गया।
अब मै विद्या थी। जय की चाची और उस घर की छोटी बहू। मुझे नहीं पता था कि सुहागरात को क्या होता है। और लड़की और लड़के का क्या सम्बन्ध होता है। उसी श्याम को घर पर ब्यूटी पार्लर वाली महिला को बुलाया गया। उस ने मेरा मेकप किया मुझे अच्छे से सजाया एक लंघा चोली पहनके तैयार किया। रात में एक कमरे में मुझे लेजाया गया और रजनी ने मुझे जिस कमरे में भेजा वो कमरा काफी सजा हुआ था। काफी सारे फूल लगे हुए थे। बेड पर झालर थी और बेडशीट काफी सुन्दर थी। मुझे वहाँ बेड पर बैठा कर रजनी ने मेरा घूंघट कर दिया। और बोली आसानी से मुँह मत दिखाना ये मुंहदिखाई की रसम होती है जिस में पति कोई गिफ्ट देता है। मैंने सिर्फ हां कहाँ। फिर रजनी भी वहाँ से चली गई। मैं वहां शरमाई सी व घबराई सी बैठी हुई थी कि इतने में श्याम वहाँ आगये। मुझे देख कर बोले तुम्हारा कैसे धन्यवाद करू तुमने हमारे घर की इज्जत बचाई है। तुम ने मुझ से शादी कर के मेरी शोभा बढ़ाई है। फिर उन्होंने मेरा घूंघट उठाया और बोले विद्या आज से तुम मेरी पत्नी हो। और मै तुमसे ये उम्मीद करता हूँ कि तुम अपना पत्नी का फ़र्ज़ निभाओगी। मैंने सिर्फ हां में गर्दन हिला दी। फिर वो मुझे चूमने लगे और मै भी उन्हें चूमने लगी। उस रात हम ने 4 बार प्यार किया। फिर थकावट के कारण हम सो गए।
अगली सुबह जब मै उठी तो सही से चला नहीं जा रहा था पर मै खुश थी कि मुझे इतना प्यार करनेवाला पति मिला और एक अच्छे और संस्कारी परिवार की मै बहु बनी।
Part 1
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