Family · Hindi

सागर बनी विद्या

सागर बनी विद्या Cover Image
In Progress | Part 1 of 4 | 0 Likes

Part 1

नेहा और सागर की दोस्ती को अभी दो साल ही हुए थे। सागर एक सीधा-साधा, कॉर्पोरेट जॉब करने वाला गंभीर इंसान था, जिसे फालतू के ड्रामे बिलकुल पसंद नहीं थे। मई के एक उमस भरे शनिवार को नेहा घर की गहरी सफाई कर रही थी। स्टोर रूम की एक पुरानी, धूल जमी ट्रंक को खोलते ही उसे नीचे एक लाल रंग का पुराना लिफाफा मिला।
कौतूहलवश जब नेहा ने उसे खोला, तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
सामने एक फोटो थी। फोटो में एक बेहद खूबसूरत महिला गहरे लाल रंग की बनारसी साड़ी, भारी आभूषण, लंबी चोटी और चेहरे पर शरमाता हुआ घूंघट लिए खड़ी थी। लेकिन जब नेहा ने चेहरा ध्यान से देखा, तो वह दंग रह गई। वो कोई औरत नहीं, बल्कि उसका अपना दोस्त सागर था!
शाम को जैसे ही सागर ऑफिस से लौटा, नेहा ने चाय के साथ वो फोटो टेबल पर रख दी। सागर का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया।
“ये… ये तुम्हें कहाँ मिली?” सागर ने हकबकाते हुए पूछा।
नेहा ने हंसते हुए कहा, “स्टोर रूम में! अब सच बताओ सागर, ये क्या है? तुम तो कमाल की लग रही हो!”
सागर ने अपनी सिचुएशन संभालते हुए गहरी सांस ली और बताया, “यार, ये कॉलेज के दिनों की बात है। हमारे कस्बे की रामलीला में ‘सीता’ का किरदार निभाने वाला लड़का ऐन वक्त पर बीमार हो गया था। मोहल्ले के अंकल लोगों ने मुझे जबरदस्ती पकड़कर साड़ी पहना दी और स्टेज पर उतार दिया। बस वही एक बार हुआ था, उसके बाद मैंने कभी साड़ी को हाथ भी नहीं लगाया!”
नेहा के दिमाग में एक खुराफात सूझी। उसने सागर की आँखों में देखते हुए कहा, “सागर, कल संडे है। मुझे भी देखना है कि मेरी ‘सीता’ कैसी लगती है। कल तुम्हें मेरे लिए फिर से साड़ी पहननी होगी। बस एक दिन के लिए!”
“क्या? पागल हो गई हो क्या नेहा! बिल्कुल नहीं। मैं कोई जोकर नहीं हूँ जो घर में साड़ी पहनकर घूमूँ,” सागर ने साफ मना कर दिया।
लेकिन नेहा भी कहाँ मानने वाली थी। उसने इमोशनल ब्लैकमेलिंग का दांव खेला, “अच्छा! दोस्ती से पहले तो कहते थे कि तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करूँगा। अब एक छोटी सी बात नहीं मान सकते? ठीक है, मैं जा रही हूँ।”
सागर ने हार मानते हुए सिर पकड़ लिया, “ठीक है, बाबा! ठीक है। सिर्फ कल दोपहर तक के लिए, वो भी सिर्फ कमरे के अंदर। बाहर किसी को पता नहीं चलना चाहिए।”
रविवार की सुबह आई। नेहा बेहद उत्साहित थी। उसने अपनी एक सुंदर फालसा रंग की जॉर्जेट साड़ी, मैचिंग ब्लाउज और अपना मेकअप बॉक्स निकाला। राहुल अनिच्छा से ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठ गया।
शुरुआत में सागर चिढ़ रहा था, लेकिन जैसे-जैसे नेहा ने उसका मेकअप करना शुरू किया, सागर को भी मजा आने लगा। फाउंडेशन, आईलाइनर, बड़ी सी लाल बिंदी और अंत में जब नेहा ने सागर को करीने से साड़ी पहनाई, तो सागर खुद को शीशे में देखकर पहचान नहीं पाया। वह वाकई एक संस्कारी और खूबसूरत महिला लग रहा था।
“वाह सागर! तुम्हारा नाम आज से ‘विद्या’ है,” नेहा ने ताली बजाते हुए कहा।
सागर ने शीशे में खुद को निहारा, थोड़ा शर्माया और पल्लू संभालते हुए बोला, “वैसे, ये साड़ी संभालना काफी मुश्किल काम है यार।” दोनों हंस पड़े और घर के अंदर ही फोटो खींचने और रील बनाने का मजेदार दौर शुरू हो गया। सागर अब पूरी तरह ‘विद्या’ के किरदार में आ चुका था और मटक-मटक कर चल रहा था।
तभी अचानक… घर की डोरबेल बजी।
[2]दोनों के होश उड़ गए। संडे के दिन इस वक्त कौन आ सकता था?
नेहा ने दरवाजे के लेंस से झांककर देखा और उसके पैर तले जमीन खिसक गई। बाहर सागर के ऑफिस के खड़ूस और कड़क मिजाज बॉस, मिस्टर शर्मा, अपनी पत्नी के साथ खड़े थे! शर्मा जी अक्सर कहते थे कि जो पुरुष अनुशासन में नहीं रहता, वो काम क्या करेगा। अगर उन्होंने सागर को इस रूप में देख लिया, तो राहुल का करियर खत्म था।
“सागर! तुम्हारे बॉस आए हैं!” नेहा ने फुसफुसाते हुए कहा।
“क्या? मुझे छुपाओ कहीं!” सागर घबराकर साड़ी का पल्लू पकड़कर बेडरूम की तरफ भागा।
लेकिन तभी शर्मा जी ने बाहर से आवाज दी, “सागर बेटा! मुझे पता है तुम अंदर हो, तुम्हारी गाड़ी बाहर खड़ी है। सोसाइटी के गार्ड ने बताया कि तुम घर पर ही हो। जरा दरवाजा खोलो, एक बहुत जरूरी फाइल पर तुम्हारे साइन चाहिए और तुम्हारी भाभी को तुम्हारी पत्नी से भी मिलना था।”
भागने का कोई रास्ता नहीं था। अगर दरवाजा नहीं खुलता, तो बॉस को शक हो जाता कि राहुल उन्हें इग्नोर कर रहा है। तभी नेहा के दिमाग में एक खतरनाक और मजेदार आइडिया आया।
“सागर, एक ही रास्ता है। तुम छुपे नहीं रह सकते। तुम मेरी ममेरी बहन ‘विद्या’ बन जाओ जो गांव से आई है। मैं कह दूंगी कि सागर किसी काम से मार्केट गए हैं।”
सागर ने डरते हुए कहा, “तुम पागल हो गई हो? पकड़े गए तो?”
“नहीं पकड़े जाएंगे, तुम्हारी रामलीला की ट्रेनिंग आज काम आएगी। चलो!” नेहा ने हिम्मत जुटाई और दरवाजा खोल दिया।
[3]
दरवाजा खुलते ही शर्मा जी और उनकी पत्नी अंदर आए। नेहा ने मुस्कुराकर उनका स्वागत किया, “अरे शर्मा जी, नमस्ते! आइए-आइए। सागर तो अभी-अभी किसी जरूरी काम से पास के मार्केट गए हैं, आधे घंटे में आते ही होंगे।”
“ओह, कोई बात नहीं। हम बैठते हैं,” शर्मा जी सोफे पर बैठ गए। तभी उनकी नजर अंदर से धीरे-धीरे चाय की ट्रे लेकर आ रही ‘विद्या’ (सागर) पर पड़ी।
राहुल ने अपनी आवाज को थोड़ा पतला और सुरीला बनाने की कोशिश करते हुए कहा, “नमस्ते जी, चाय पीजिए।”
शर्मा जी की पत्नी विद्या को देखकर बेहद खुश हुईं, “अरे नेहा, ये कौन है? कितनी सुशील और सुंदर लड़की है!”
“जी, ये मेरी ममेरी बहन है, विद्या । गांव से आई है,” नेहा ने ‘विद्या’ की पीठ थपथपाते हुए कहा।
अब असली थ्रिलर और फनी ड्रामा शुरू हुआ। शर्मा जी की पत्नी को रागिनी इतनी पसंद आ गई कि उन्होंने वहीं बैठे-बैठे अपने कुंवारे साले (भाई) के लिए विद्या का हाथ मांगने की सोच ली!
“विद्या बेटा, जरा यहाँ बैठो। तुम्हारी शादी हो गई क्या?” शर्मा जी की पत्नी ने पूछा।
सागर (विद्या) अंदर ही अंदर कांप रहा था। उसने घूंघट को थोड़ा और आगे खींचते हुए कहा, “जी… जी नहीं। अभी हम पढ़ाई कर रहे हैं।”
तभी शर्मा जी की नजर रागिनी के पैरों पर पड़ी सागर जल्दीबाज़ी में बूट पहनना तो भूल गया था, लेकिन उसके पैर मर्दों जैसे बड़े और थोड़े बाल वाले थे, जिन्हें वो साड़ी के नीचे छुपाने की कोशिश कर रहा था। शर्मा जी को थोड़ा अजीब लगा, “रागिनी बेटा, तुम्हारे पैर… थोड़े…”
नेहा ने तुरंत बात संभाली, “अरे भाभी जी, गांव में खेतों में काम कर-करके बेचारी के पैर थोड़े सख्त हो गए हैं। और हाँ, इसे एक बीमारी है, इसके पैर अचानक सूज जाते हैं!”
इसी बीच शर्मा जी के फोन पर राहुल के नंबर से एक रिंग गई (जो सोफे के पीछे म्यूट पर था पर वाइब्रेट कर रहा था)। शर्मा जी बोले, “अरे, मैं सागर को फोन लगाता हूँ कि जल्दी आए।”
जैसे ही शर्मा जी ने फोन मिलाया, विद्या की साड़ी के अंदर (कमर में खोंसे हुए मोबाइल) वाइब्रेशन होने लगा। विद्या का पेट हिलने लगा।
“ये कैसी आवाज है?” शर्मा जी ने चौंककर पूछा।
विद्या ने तुरंत अपने पेट पर हाथ रखा और अजीब सी आवाजें निकालते हुए बोला, “अइयो! पेट में बहुत तेज गैस बन गई है जी! सुबह से कुछ उल्टा-पुल्टा खा लिया था।” यह सुनकर शर्मा जी और उनकी पत्नी असहज हो गए।
तभी सोसाइटी का गार्ड भागता हुआ फ्लैट के अंदर आया (दरवाजा खुला ही रह गया था)। उसने आते ही चिल्लाया, “शर्मा जी! शर्मा जी! नीचे आपकी गाड़ी को किसी ने ठोक दिया है, जल्दी चलिए!”
यह सुनते ही शर्मा जी और उनकी पत्नी बदहवास होकर नीचे की तरफ भागे, “फाइल हम बाद में साइन करा लेंगे!”

विद्या का रिश्ता
शर्मा जी और उनकी पत्नी अपने घर पर विद्या की बात कर रहे थे । शर्मा जी को विद्या अपने कुंवारे साले के लिए बहुत पसंद थी। शर्मा जी की पत्नी का नाम रेनू था। रेनू के भाई का नाम सोनू था। रेनू ने अपने भाई को विद्या की फोटो भेज दी । सोनू को फोटो बहुत पसंद आई। सोनू ने शादी के लिए हा केर दी। रेनू ने ये बात अपने पति को बताई .दोनो ने सोचा कि क्यों ना हम पहले नेहा कहें मेरे बारे में बात करें। मिस्टर शर्मा और रेनू दोनो इस बात पर सहमत हो गए। उन्होंने नेहा से मिलने को कहा। वो बोले सागर से फाइल भी साइन कर लेंगे और विद्या के बारे में भी रेणु से बात कर लेंगे।
अगले दिन मिस्टर शर्मा ने नेहा को अपने घर बुलाया। नेहा । रेनू के घर पहुँची।रेनू ने नेहा से विद्या के बारे में पूछा।और उसे बताया कि विद्या उन को अपने भाई सोनू के लिए पसंद आ गई है और सोनू को भी विद्या पसंद है।।रेनू ने कहा विद्या संस्कारी और अच्छी लड़की है। विद्या खुबसूरत और गुणी भी है। हमें विद्या बहुत पसंद आई। सोनू से हमने बात कर ली है। अगर वो कहे तो वो रिश्ता पक्का करने के लिए घर आना चाहते है।नेहा रेनू जी बात आपकी सही है। लेकिन मुझे भी अपनी बहन विद्या से इस बारे में बात करनी पड़ेगी। नेहा अब मैं चलती हूं। विद्या कहती हैं, इस बारे में मैं बात करूंगी।
नेहा जैसे ही घर पहुँची और दरवाजा बंद हुआ, नेहा जोर-जोर से हंसने लगी। सागर, नेहा, क्या हुआ? तुम इतना क्यों हँस रही हो? ये बात मैं तो विद्या को बताऊँगी ना कि सागर को।सागर को ना चाहते हुए भी फिर लड़की के कपड़े पहनने पड़े, बोलो नेहा नेहा:- तुम्हारे लिए मिस्टर शर्मा और उनकी पत्नी ने एक रिश्ता भेजा है। शायद तुम शादी करना चाहो यह रिश्ता विद्या के लिए है। विद्या :-अच्छा, और लड़का कौन है? नेहा:- सोनू , शर्मा जी का साला तो क्या मैं बात करूँ? , “भगवान के लिए नेहा! मुझे कुछ समय चाहिए।मैं अभी कुछ नहीं कह सकती।वैसे भी तुम्हें पता है मैं एक लड़का हूँ।मैं एक लड़के से कैसे शादी कर सकती हूँ? नेहा विद्या को आइने के पास ले गई बोली तुम कहाँ से लड़के लगते हो। पूरी लड़की हो जिसकी शादी की बात चल रही है। विद्या ने सोचा कि मजाक कर रही है। विद्या:- नेहा ये सोनू करता क्या है? वैसे मुझे कौन सी शादी करनी है? और बात करने में कुछ नहीं जाता तो विद्या ने मिलने के लिए हा कर दी। विद्या ने सोचा जब सोनू को पता चलेगा तब खुद ही मना कर देगा।नेहा ने विद्या की बात रेनू को बता दी। कि सोनू से विद्या मिलने को तैयार है। रेनू ने नेहा को कहा हम रविवार आएंगे सोनू के साथ। दोनों एक दूसरे से बात करोगे अगर हाँ विद्या की हुई तो एक अच्छा सा मुहूर्त देखकर हम इन दोनों की सगाई कर देगे।नेहा ने भी हाँ कह दी।नेहा ने विद्या को ये बात बताई कि रविवार को तुम्हें देखने आ रहे हैं अब से तुम विद्या बन कर रहोगी।घर के सारे काम तुम ही करोगी।सोमवार से रविवार तक सागर विद्या बन कर घर के सभी काम किये और मैकअप करना भी सीख लिया साथ में सादी पहनना और कान भी छेदवालिये किसी को शक ना हो इस के लिए सिलिकॉन ब्रेस्ट भी लगवालिये।
रविवार को सोनू अपनी बहन रेनू के साथ विद्या के घर मिलने पहुंचा। सोनू की लंबाई 5 फुट 6 इंच है, वह मज़बूत मांसपेशियों वाला और हैंडसम लड़का है। विद्या की हाइट 5 फीट 3 इंच, हाथ लड़कियों की तरह कोमल, खूबसूरत चेहरा, रंग गौरा। नेहा ने मुझे बुलाया।मै सजधज के सब के लिए चाये ले के आई। सब को नमस्ते कहा और चाय दी फिर किचन में चली गई।। फिर मुझे सोनू कहो मिलवाया गया . मैं उसे देखकर दंग रह गई।मेरे मुँह से शब्द नहीं निकल रहे थे । नेहा और रेणु दोनों बाहर चले गए। हम दोनों को अकेले में बात करने के लिए। सोनू को देखकर मेरे मुँह से शब्द नहीं निकल रहे थे। सोनू बहुत कुछ बोला मेरा ध्यान हमारी पर्सनैलिटी पर था । उसने क्या कहा मुझे नहीं पता बस मैंने हा मैं सर हिलादिया। दोनों ने एक-दूसरे को देखा और खुशी में खिलखिलाकर हंस पड़े। रेनू ने सोनू से कहा कि क्या तुम्हें विद्या पसंद है सोनू ने हा कहा मेरे से नेहा ने पूछा क्या हुआ मैं शर्मा के कुछ नहीं कहा बस अंदर चली गई। इसे रेनू ने हा समझा और मुझे बाहर बुला के मेरी उंगली में एक अंगी पहनना दी। बोली आज कहो विद्या हुई हमारी।
विद्या की सगाई पूरी हुई।

2763 Views 0 Comments
Disclaimer

CD Stories is a multilingual open platform. Stories published are generated by writers. The platform has not reviewed, modified, or validated contents and holds no liability regarding content quality or copyright infringements.

Discussion (0)

No comments shared yet. Be the first to share your thoughts!
Want to comment? Please Login or Sign Up.
Reading preferences
100%
Home Discover 0 Alerts Writers Login