मेरा नाम सागर है। मैं अभी बेरोजगार हूं।मेरे घर में मैं और मेरी माँ सविता रहती हैं। मैं एक रेजिडेंस कॉलोनी में रहता हूँ। एक दिन मेरी मां ने बताया कि कॉलोनी में एक फैंसी ड्रेस कॉम्पिटिशन हो रहा है। मैंने हमें तुम्हारा नाम लिखवा दिया है। तुम्हें एक दुल्हन के रूप में भाग लेना है। सागर: माँ, मैं और लड़की के रूप में इस कॉम्पिटिशन में भाग नहीं लूगा। सविता जी: बेटा मान जा देख मेरी इज्जत का सवाल है। मैंने बड़े भरोसे से तेरा नाम लिखवाया है। क्या तू चाहता है कि तेरी माँ सर शर्म से झुक जाये। सागर: नहीं मां, मैं ये नहीं कहता. पर मैं ये बात कैसे मानु, ठीक तुम्हारे लिए मैं ये कर लुगा। कंपटीशन कब है? अगले महीने सोमवार को सोसाइटीमीटिंग हॉल में।ठीक है, मुझे क्या तैयारी करनी है? सरिता जी: उसकी चिंता मत कर मैं सब सिखा दूंगी। फिर शुरू हुई मेरी ट्रेनिंग । अब से तुम्हारा नाम जान्हवी है। इस नाम की आदत डाल लो।पुरी सोसायटी में मेरा नाम जानवी कुछ ही दिनों में लोकप्रिय हो गया।सविता जी ने मेरी ट्रेनिंग शुरु कर दी। एसबी से पहले वस्त्र यानी ब्रा पैंटी और सूट सलवार पहननी सीखी।
फिर माँ ने अपनी एक सहेली को घर पे बुलाया और मुझे मैकअप करना सिखाया साथ में सारी पहनना, और सदी में कई चलते हैं, खाना बनाना घर में झाड़ू पोछा करना, कपडे धोना, लड़की कैसे उठती है बैठती है, कैसे बात करती है हैं, बात करते हुए कैसे औरत हाथ चलती है एक महीने में मेरी काफी प्रैक्टिस हो गई थी। मुझे क्रॉसड्रेसिंग की अब आदत लग गयी थी। माँ ने जीत ने के लिए मेरी नाक कान भी छिदवा दिए।फिर आया कॉम्पिटिशन का दिन।
उस दिन सोसाइटी के मीटिंग हाल को खुबसूरती कहो सजया गया।वह सभी महिलाएं अपने बच्चों के साथ थीं। प्रतियोगिता पूरा होने पर सागर को प्रथम पुरस्कार मिला। उस दिन सोसाइटी मे शादी भी थी। लेकिन लड़की वाले घर से गायब थे। वाहा पर अभी भी सविता जी और सागर और कुछ महिलाएं रुकी हुई थीं। जब बारात वहां पहुंची तब उनको पता चला कि लड़की वाले घर से गायब है।वे जिद पे अडग्ये की यहा हम शादी करके के जाएंगे। कोई भी अपनी लड़की की शादी नहीं करना चाहती थी सविता ने कहा कि मैं अपनी बेटी की शादी आप के बेटे कर दुगी अगर आप को कोई एतराज़ ना हो।सागर ने कहा माँ मैं लड़का हू , मैं कैसे किसी और लड़के से शादी एक लड़की बन के कर सकता हूँ । वाह बेटी सभी महिलाओ ने भी कहा हा जाह्न्वी भी काफी खूबसूरत है। ये जोड़ी काफी अच्छी रहेगी। सविता जी ने काफी समझा लड़का काफी समझदार है और तेरा काफी ख्याल रखेगा। लड़के का नाम रोहित था. जो दूल्हा बना हुआ था. रोहित और जान्हवी की शादी के लिए पंडित जी को बुलाया गया वही समय जान्हवी और रोहित की शादी हो गई। फिर विदाई का समय आया। जान्हवी को रोहित के साथ विदा किया।उसकी ससुराल के लिए।
रोहित को कोई फर्क नहीं पड़ता था बस उसे अपने घर की इज्जत की थी, रास्ते में रोहित ने पूछा जान्हवी तुम क्या सोच रही हो। जान्हवी मुझे तुमसे कुछ कहना है, मैं असल में एक लड़का हूं जो दुल्हन बन के कंपीटिशन में हिस्सा ले रहा था अपनी मां के कहने पर। रोहित हमारी शादी हो गई है। रोहित: मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम लड़के हो या लड़की। तुमने मेरे परिवार की इज्जत बचाई है। आज से तुम मेरी बीवी हो। घर पहुंच के तुम्हें एक अच्छी बहू बनना है। जान्हवी अपनी ससुराल पहुंची और वहां उसका स्वागत बहुत अच्छा हुआ, और गृहपरवेश जान्हवी ने रोहित के साथ किया। अब वो रोहित की पत्नी थी। रोहित के पिता का नाम सूरज और माँ का नाम कविता था। कैसा होगा जान्हवी का आगे का सफर अपने ससुराल में? मिलते है अगले भाग में।
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