जान्हवी अपने ससुराल पहुची। वाह उसका स्वागत बड़े धूम धाम से हुआ।ये बात सिर्फ रोहित को पता थी कि वो एक लड़का है। लेकिन वो अब रोहित के घर की बहू और रोहित की पत्नी थी।रोहित के माता पिता सूरज और कविता ने चेन की सांस ली कि सब कुछ सही से हो गया और उनकी इज्जत भी बच गई। अब घर के रीति रिवाज का समय था। जयसै मुंह दिखाई, संता संती खेलना। घर के देवताओ की पूजा, ये सब काम अच्छे कहते हैं। शादी में आए सारे महमान अब जा चुके थे। एबी सिर्फ परिवार के सदसया फिर रोहित ने बताया कि जान्हवी असल में सागर है एर लड़का लेकिन अब वो इस घर की बहू है तो अब उसे घर की बहू और मेरी पत्नी बन के रहना होगा जल्दी ही जान्हवी को पूरी लड़की में बदल दूंगा। फिर वो पूरी तरह से मेरी पत्नी बन जाएगी।रोहित ने कहा कि जाह्नवी अब तुम अपनी माँ से बात कर लो।जान्हवी ने अपनी माँ सविता से कहा बात की बोली माँ मैं जान्हवी बोल रही हूँ। मैं अपने ससुराल में खुश हूं। अब मेरे पति मुझे जल्दी कहेंगे पूरी औरत नहीं देंगे। जिसके लिए मुझे सेक्स रिप्लेसमेंट सर्जरी करानी पड़ेगी। मेरी सास कविता जी आप कहना चाहती हैं।कविता: नमस्ते समधन जी। मेरा नाम कविता है.और मेरे पति का नाम सूरज है. आपने उस दिन हमारी जो हमारी इज्जत बची है हम सब उस के लिए बहुत आभारी हैं। जान्हवी अब हमारे घर की बहू है। इस की चिंता मत कीजिए हम इसका बहुत ध्यान रखेंगे। जल्दी ही जान्हवी पूरी औरत और आप की बेटी बन के आप से मिलेंगी उस दिन हम एक छोटी सी पार्टी रखेंगे। आप ज़रूर आइएगा। वो दिन भी जल्दी आ गया जब जान्हवी आदमी से पूरी औरत बनगी और फिर एक पार्टी में सविता और कविता की मुलाक़ात हुई। दौनो बहुत खुश थी। आज एक परिवार पूरा होगा। आज जान्हवी अपने ससुराल में बहुत खुश है। और दौनो परिवार को खुशियाँ मिल रही हैं।
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