अध्याय 1: नई शुरुआत
आज मैं श्रीमती विद्या विनय कुमार हूं। लेकिन कुछ समय पहले तक मैं एक लड़का था, लेकिन मेरा नाम सागर था। उस समय मेरी उम्र 22 वर्ष थी जब मैंने विनय से शादी की और मेरी लंबाई लगभग 5 फीट 3 इंच है। बचपन से ही मेरा स्वभाव शांत और सौम्य रहा है। मेरी बोलचाल और हाव-भाव भी सामान्य लड़कों से कुछ अलग थे। इस वजह से कई लोग मुझे चिढ़ाते थे, लेकिन मैंने धीरे-धीरे अपनी पहचान को स्वीकार करना सीख लिया।
शादी के करीब -करीब चार साल पहले मैंने 12वीं की परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की और आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय में आवेदन किया। प्रवेश मिलते ही पूरे परिवार में खुशी का माहौल था। सभी चाहते थे कि मैं अपनी नई ज़िंदगी की शुरुआत पूरे उत्साह के साथ करूँ।
इसी बीच पिताजी को उनके कार्यालय में एक महत्वपूर्ण परियोजना की ज़िम्मेदारी मिल गई। वे चाहते हुए भी मेरे साथ दिल्ली नहीं जा सके। मेरी निराशा देखकर उन्होंने मुझे समझाया,
"बेटा, मैं जानता हूँ कि तुम्हें मेरी ज़रूरत है, लेकिन यह काम टालना मेरे लिए संभव नहीं है। तुम चिंता मत करो। विनय तुम्हारे साथ रहेगा और तुम्हारी पूरी मदद करेगा।"
विनय अंकल पिताजी के बचपन के मित्र थे। वे हमारे परिवार के बेहद करीबी थे और घर के सदस्य जैसे ही माने जाते थे। इसलिए मेरे माता-पिता को उन पर पूरा विश्वास था।
पापा: "बेटा, मुझे माफ़ करना। ऑफिस में बहुत ज़रूरी प्रोजेक्ट आ गया है। चाहकर भी मैं तुम्हारे साथ दिल्ली नहीं जा पा रहा।"
मैं: "लेकिन पापा, आपने तो वादा किया था कि आप मेरे साथ चलेंगे।"
पापा: "मुझे पता है, और मुझे भी बहुत बुरा लग रहा है। लेकिन तुम चिंता मत करो। काम खत्म होते ही हम तुमसे मिलने आएंगे।"
मैं: "फिर मैं अकेला कैसे जाऊँगा?"
पापा: "तुम विनय अंकल के साथ चले जाओ। वे मेरे बचपन के दोस्त हैं। तुम्हारी एडमिशन, फीस और रहने की सारी व्यवस्था कर देंगे।"
मम्मी: "हाँ बेटा, अपना ध्यान रखना। कोई भी परेशानी हो तो तुरंत फोन करना।"
मैं: "ठीक है...।"
________________________________________
दिल्ली की यात्रा
प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने में अभी चार दिन बाकी थे। तय समय पर मैं और विनय अंकल दिल्ली के लिए रवाना हो गए। बस अड्डे पर काफी भीड़ थी। बड़ी मुश्किल से हमें पीछे की दो सीटें मिलीं। सौभाग्य से मुझे खिड़की वाली सीट मिल गई, जिससे सफर थोड़ा आरामदायक हो गया।
बस स्टैंड पर
विनय अंकल: "चलो बेटा, जल्दी करो। बहुत भीड़ है, कहीं बस छूट न जाए।"
मैं: "जी अंकल।"
विनय अंकल: "अरे, पीछे दो सीटें मिल गईं। तुम खिड़की वाली सीट पर बैठ जाओ।"
मैं: "थैंक यू, अंकल।"
कुछ देर बाद अंकल ने बातचीत शुरू की।
बस चलने के कुछ देर बाद
विनय अंकल: "तो बताओ... कॉलेज लाइफ शुरू होने वाली है। कोई गर्लफ्रेंड है क्या?"
मैं: "नहीं अंकल, अभी तक नहीं।"
विनय अंकल (हल्की हँसी के साथ): "अच्छा... तो कोई बॉयफ्रेंड?"
मैं (हैरानी से): "क्या? नहीं अंकल... मैं स्ट्रेट हूँ।"
विनय अंकल (हँसते हुए): "अरे, मज़ाक कर रहा था। वैसे तुम दिखते तो बिल्कुल लड़की जैसे हो।"
मैं (चुप होकर): "..."
वह हंस पड़े और बोले कि तुम लड़की नहीं बिल्कुल लड़की की तरह लगते हो। मुझे बहुत बुरा लगा पर पता था कि यह सच भी है। कुछ देर बाद अंकल ने कोक निकाली और पीने लगे और मुझसे पूछे कि पियोगे? तो मैंने कहा हां अंकल फिर उन्होंने मुझे खुद कोक कपिल आई पर थोड़ी सी कोक मेरे मुंह से बाहर आ गई थी क्योंकि बस बहुत तेजी से चल रही थी।
यह देखकर अंकल ने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख दिया और जो थोड़ी कोख बाहर निकल गई थी वह चूसकर ही गए। मैं एकदम चकित रह गया और कुछ बोल ना पाया। अंकल ने मुझसे कहा कि खाने की कोई चीज बेकार में नहीं जानी चाहिए इसीलिए उन्होंने ऐसा किया भी सच बताऊं तो मुझे अंकल का वह किस बुरा नहीं लगा था मुझे समझ में आ गया था कि अंकल मुझे इन चार-पांच दिन में ऐसे काफी सरप्राइज देंगे।
विनय अंकल: "इतना सीरियस मत हुआ करो, मैंने तो बस मज़ाक किया।"
मैं (धीरे से): "जी..."
मैंने खुद ही अंकल से पूछ लिया कि आप यह सब जान पूछ कर करते हो ना? मैं किसी को नहीं बताऊंगा तो अंकल बोले कि हां मैं बहुत पसंद हूं उन्हें। मैंने पूछा कि मुझ में ऐसा क्या है? अंकल बोले कि तेरी पतली कमर और लड़कियों जैसे मोटे मोटे बूब्स मन करता है कि सारा रस पी लो। मैंने कहा बस करो अंकल शर्म आती है। अंकल ने बोला कि अगले कुछ दिन मेरे साथ मेरी। बीवी बन कर रहे सारी शर्म भुला दूंगा। मुझे अब यह सब अच्छा लगने लग गया था मैंने अंकल को बोला कि अगर मैं हां बोलूं तो क्या करोगे?
" वैसे भी दिल्ली जाने को लेकर घबराहट हो रही है" कोई तो सहारा चाहिए।
अंकल बोले कि तुझे नंगा रखूंगा जब भी तू अकेली होगी तेरे चूचे चूस लूंगा सुबह शाम निप्पल काट काट कर लाल कर दूंगा और तेरी गांड मारूंगा और अपना पानी वही झाड़ दूंगा। अब मुझसे भी अंकल को मना करा नहीं गया। मैंने हां कर दी और बोला कि ठीक है अगले कुछ दिनों तक आपकी। बीवी बनने के लिए तैयार हूं। अंकल खुशी के मारे जैसे पागल ही हो गए एंड बोले कल डेल्ही में हॉस्टल में पहुंचने दे फिर देख तेरी क्या हालत करता हूं। मैं भी इतरा कर बोल दिया कि देख लेंगे।
उन्होंने हौसला बढ़ाते हुए कहा, "हर शुरुआत थोड़ी कठिन होती है, लेकिन मेहनत करने वाला इंसान कहीं भी अपना रास्ता बना लेता है।"
उन्हें मेरा नाम विद्या रख दिया बोले आज से तुम मेरी बीवी हो तुम्हारा नाम विद्या है। हम दिल्ली जाकर शादी करेंगे. और दोनों सुहागरात मनाएंगे। मुझे शर्म आ गई। उनकी बात सुनकर मेरे मन का डर काफी कम हो गया। रास्ते भर हमने पढ़ाई, भविष्य, करियर और दिल्ली की ज़िंदगी के बारे में बातें कीं।
बीच में बस एक ढाबे पर रुकी।
कुछ ही घंटे बाद बस एक ढाबे पर रुकी एंड ड्राइवर बोला कि यहां बस आधे घंटे तक रुकेगी भी हम बाहर खाना खाने निकले और अंकल बोले कि तुझे एक नई डिश ट्राय कर आऊंगा मेरी जान तो वह मुझे ढाबे के पीछे खेत था वहां ले गए। वहां ले जाकर उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला और बोला कि चूस। मैं तो देख कर हैरान ही रह गया इतना बड़ा लंड मेरे लंड से तो 4 गुना बड़ा था। मैंने बोला जानू तुम्हारा तो बहुत बड़ा है मुझे डर लगता है। अंकल बोले साली जल्दी चूस वरना बस निकल जाएगी। मैंने जैसे ही थोड़ा सा मुंह में लिया तो अंकल का लंड और भी बड़ा होने लगा और अंकल अंदर बाहर करने लगे। मुझे धीरे-धीरे अंकल का लंड स्वादिष्ट लगने लगा था इतना बड़ा था एंड कितना गरम भी था। फिर अचानक अंकल पूरा झड़ गए एंड मेरा मुंह पूरा उनके पानी से भर गया था भी विनय यानी अंकल ने बोला कि इसको सारा अंदर कर ले तो मुझे लेना ही पड़ा। काफी गर्म था और गाढ़ा भी एंड काफी सोल्टी सा स्वाद था। अंकल बोले मेरी रानी यह तो बस शुरुआत है आने वाले दिनों में देख तेरी क्या हालत करता हूं।फिर हमने खाना खाया, चाय पी और थोड़ी देर आराम करने के बाद दोबारा यात्रा शुरू कर दी
दिल्ली में पहला दिन
अगले दिन मैं और अंकल दिल्ली पहुंचे। दिल्ली में हमने मेरे कॉलेज के पास ही एक होटल में रुकने का सोचा। अंकल ने काफी अच्छे एंड महंगे होटल में रूम बुक करवाया। मैं भी बहुत खुश था। रूम में घुसते ही बहुत अच्छा लगा काफी बड़ा रूम था एंड बहुत ही सुंदर भी था।
मैंने अंकल को शुक्रिया बोला और उन्हें गले लगा लिया। अंकल बोले यहां तो कोई नहीं है यहां तो जानू बोल सकती हो। मैंने कहा हां बेबी आगे से ध्यान रखूंगी भी अंकल बोले कि चलो रेडी हो जाओ फिर तुम्हारे लिए लड़कियों वाले कपड़े भी लेने हैं इन तुमसे शादी करके ही तुम्हारी सील तोड़ दूंगा। आप कैसे बातें करते हो जी मुझे शर्म आती है मैंने कहा। थोड़ी देर बाद रेडी होकर मार्केट चले गए
शादी की शॉपिंग
दुल्हन के लिए
• ब्राइडल लहंगा/साड़ी
• मेहंदी, हल्दी, संगीत और रिसेप्शन के आउटफिट
• ज्वेलरी (हार, झुमके, मांगटीका, चूड़ियां, कलीरे)
• फुटवेयर (हील्स और आरामदायक सैंडल)
• मेकअप और स्किनकेयर
• क्लच/पर्स
• नाइटवेयर और दैनिक पहनने के कपड़े
🤵 दूल्हे के लिए
• शेरवानी
• सूट/ब्लेज़र
• कुर्ता-पायजामा
• साफा/पगड़ी
• जूते
• घड़ी और अन्य एक्सेसरीज़
👗 कपड़े
• शादी का ब्राइडल लहंगा/साड़ी
• मेहंदी का आउटफिट
• हल्दी का पीला आउटफिट
• संगीत का गाउन/लहंगा
• रिसेप्शन का गाउन या साड़ी
• विदाई का सूट या साड़ी
💎 ज्वेलरी
• हार (नेकलेस)
• झुमके
• मांगटीका
• नथ
• चूड़ियां/चूड़ा
• कलीरे
• पायल
• अंगूठियां
• कमरबंद (यदि चाहें)
👠 फुटवेयर
• शादी के लिए हील्स
• मेहंदी/संगीत के लिए आरामदायक सैंडल
• एक फ्लैट चप्पल बैकअप के लिए
💄 मेकअप और ब्यूटी
• मेकअप किट
• स्किनकेयर प्रोडक्ट्स
• हेयर एक्सेसरीज़
• परफ्यूम
• नेल पॉलिश/नेल किट
👜 एक्सेसरीज़
• ब्राइडल क्लच
• सेफ्टी पिन, फैशन टेप
• दुपट्टा पिन
• टिश्यू और टच-अप किट
🏡 शादी के बाद के लिए
• नाइटवियर
• रोज़मर्रा के सूट/कुर्ते
• साड़ियां
• हैंडबैग
• घड़ी
मुझे काफी शर्म आ रही थी फिर अंकल ने मुझे हेयर रिमूवल क्रीम भी ले कर दी और बोले कि मेरी जान चिकनी हो जाओ आज तेरी जिस्म का रस पीना है कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।
मैंने भी बोल दिया हां मेरे राजा अब चलो भी होटल में वहां देखेंगे। हम सभी शॉपिंग केर के होटल पहुंचें इतने लंबे इंतजार के बाद हम 3:00 बजे होटल पहुंचे और हम काफी थक भी गए थे। अंकल बोले कि तू तैयार हो जा यह पहन कर जल्दी से। मैंने कहा पहले तुम बाहर जाओ एंड जब मैं तैयार हो जाऊंगी तो तुम्हें कॉल कर दूंगी। उनके जाने के बाद मैंने तैयार होना चालू किया।
मैंने पहले चेहरा साफ किया फिर मॉइस्चराइज़र और प्राइमर लगाएँ फिर ब्राइडल मेकअप शुरू किया
पहले फाउंडेशन और कंसीलर फिर कॉन्टूर, ब्लश और हाईलाइटर फिर ई मेकअप (आईशैडो, आईलाइनर, मस्कारा, नकली पलकों का ,लिपस्टिक और सेटिंग स्प्रे उपयोग किया
हेयर स्टाइल
जूड़ा, कर्ल्स या ब्रेडेड स्टाइल। गजरा, फूल , हेयर एक्सेसरी लगाएँ।
ब्राइडल ड्रेस पहनाना
लहंगा सही तरीके से ड्रेप किया । दुपट्टा सुंदर ढंग से सेट किया ।
ज्वेलरी
हार, झुमके, मांगटीका, नथ, चूड़ियाँ, बाजूबंद, कमरबंद और पायल पहना।
• अंतिम टच
बिंदी , मेहंदी ,परफ्यूम लगाएँ।
तैयार होने के बाद मैंने विनय को फोन किया।
जबतक विनय आ रहे थे मैंने अपने आप को शीशे में देखा और बिल्कुल हैरान रह गई। मैं बिल्कुल लड़की ही लग रही थी छोटी सी हाइट थी और बूब्स बहुत मोटे थे। मेकअप में भी मुझे लड़की बनने में पूरा साथ दिया। तभी गेट पर एक दम से नोक हुआ। मेरी सांसे तेज चल रही थी पर गेट तो खोलना ही था हिम्मत करके मैंने गेट खोला और विनय सामने खड़े थे । वह अंदर आए और दरवाजा लॉक कर दिया। मुझे देखते ही रह गए और बोले कि मेरी जान जन्नत लग रही है तू।
फिर हम दोनों तैयार हो गए मंदिर में। वाहा पंडित जी ने हम दोनों की शादी कराई। विनय के दोस्त ने मेरा कन्यादान किया और विनय ने मेरी मांग में सिन्दूर और गले में मंगल सूत्र पहनाया। मै श्रीमती विद्या विनय कुमार बन गई। शादी के बाद हम दोनों होटल में वापस आ गए और हमारा कमरा अच्छे से सजा हुआ था।
मैंने विनय से कहा, "मेरे लिए इतनी अच्छी व्यवस्था करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।"
मै कमरे में थी. विनय कमरे में आने के बाद मेरा घूंघट उठाया। मैंने फिर उनके पैरों को छुआ लेकिन उन्होंने मुझे रोका और गले से लगा लिया एंड बोले कि तेरी जगह मेरे दिल में और लंड पर है। मैं बहुत शर्म आ रही थी और कुछ बोल नहीं रही थी ।मुझे गोदी में उठाया और बेड पर ले गए।
मैंने बोला जानू लाइट्स बंद ही कर दो ना। उन्होंने बोला कि नहीं रानी आज मैं तेरे जिस्म से खेलूंगा बहुत सालों से नजर थी तेरे जिस्म पर आज तू अपने आप को औरत बनते देख आज लाइट्स ऑफ नहीं करूंगा। मैंने घुंघट ले लिया फिर विनय ने मेरा घूंघट उठाया और मेरे होंठो को चूमा और बोला क्या रस है। काफी देर तक तो विनय ने मेरे होठों को नहीं छोड़ा लेकिन मैंने भी विनय का पूरा साथ दिया था धीरे-धीरे विनय के हाथ मेरी कमर पर घूमने लगे और मेरी नाभि तक पहुंच गए। ऊपर विनय के हॉट चल रहे थे और नीचे विनय मेरी पीठ पर और पेट पर हाथ फेर रहे थे।
विनय ने फिर मेरा पेटीकोट उतार दिया और मेरे पेट को चूमने लगे चूमते कम थे चार्ट ज्यादा रहे थे।च।च में काट भी देते थे। मैंने कहा जानू दर्द होता है तो बोले मेरी जान इस दर्द की आदत डाल लो और हंस पड़े। विनय ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए थे धीरे-धीरे और मैं सिर्फ ब्रा पैंटी में थी मुझे काफी मजा आ रहा था और मैंने भी विनय का लंड पकड़ा और उसे आजाद कर दिया बाहर निकाल कर।
फिर मैंने विनय के लंड को चूसना शुरू कर दिया 5 इंच का लंड जल्दी ही 8 इंच का हो गया मेरे मुंह में उनका लंड पूरा आ भी नहीं रहा था। उन्होंने खूब मेरे मुंह को चोदा और वहीं झड़ गए भी मैंने अच्छी बीवी की तरह उनका सारा माल पी लिया। विनय बोले कि मजा आ गया मेरी रानी तेरे जिस पर यह कपड़े कैसे यह कहकर उन्होंने मेरी ब्रा और पैंटी भी उतार दी।
अब मैं पहली बार नंगी थी किसी के सामने। विनय ने मेरे बूब्स पर हाथ फेरा और बोले कि इनको छुपाया ही मत करो सब को देखने का हक है इन्हे और इनका रस पीने का भी। यह कहकर विनय ने मेरे एक निप्पल को चूसना शुरू कर दिया और मैं भी उनके बालों पर हाथ फेरने लगी। कभी वह लेफ्ट निप्पल को चूसते और कभी राइट वाले को भी दोनों निप्पल लाल हो गए थे लेकिन उनकी तो प्यास ही नहीं मिट रही थी।
काफी देर बाद मैंने कहा कि दूध ही पीते रहोगे क्या? विनय बोले मेरी जान तेरा दूध तो सबको पीना चाहिए इतना टेस्टी है यह। मैंने बोला कि तुम ही बहुत हो इन के लिए किसी और का तो नंबर ही नहीं आने दोगे। विनय हंस पड़े और फिर उन्होंने मुझे उल्टा लिटा दिया और मेरी गांड पर थूक लगाने लगे मुझे पता था कि मेरी हालत खराब होने वाली है पर कुछ कर नहीं सकती थी बस आज अपने पति को खुश करना था।
फिर उन्होंने भी ज्यादा देर ना करते हुए अपना लंड छठ के से मेरी गांड में डाल दिया। मैं चीख पड़ी दर्द के मारे। काफी दर्द हो रहा था मुझे पर विनय थे कि उन्हें मेरे दर्द से कोई खास मतलब था ही नहीं उन्हें तो बस अपने मजे की पड़ी थी।10 मिनट बाद जाकर दर्द कम हुआ मेरा और मैं भी मजे करने लगी। अंकल ने मुझे खूब चोदा उनके लंड ने मेरा छेद बड़ा भी कर दिया था और मेरी वर्जिनिटी भी छीन ली थी। फिर उन्होंने मेरी गांड में ही अपना माल छोड़ दिया और थक कर गिर गए। विनय ने फिर मेरी चूचियों को चूमा और बोले कि कल तुम हॉस्टल में नहीं मेरे साथ मेरे घर में रहोगी मेरी पत्नी बन कर ।वे मुस्कुराकर बोले, "अब तुम्हारा ध्यान घर के काम के साथ रोज चुदाई पढ़ाई मे भी होना चाहिए।उस दिन के बाद हम दोनों पति पत्नी बन गए और आज मैं अपने ससुराल में हूं रोज अपने पति का ख्याल रखती हूं
Discussion (0)