आखिरकार हम घर पहुँचे, लेकिन मेरा मन अभी भी उस दिन की यादों में खोया हुआ था। मैं उस एहसास को अपने दिमाग से निकाल नहीं पा रही थी। मैं चाहती थी कि अगले दिन भी लड़की बनकर ही रहूँ। मैंने प्राची से यह बात कही। उसने कहा कि वह मेरी मदद करेगी, बशर्ते मैं उसकी बात मानूँ। फिर क्या था, हम दोनों मेरे कमरे में बदलाव करने लगीं। मेरा कमरा अब लड़कों जैसा नहीं दिख सकता था; उसे लड़कियों के कमरे जैसा दिखना था।
प्राची के पास मेरे लिए एक और बड़ा सरप्राइज़ था। उसने मेरी दो सबसे करीबी दोस्तों, तमन्ना और निशा, को मेरे नए कमरे और मेरे बदले हुए रूप को देखने के लिए बुलाया था। निशा सबसे पहले आई और 'मैन केव' (लड़कों के कमरे) को राजकुमारी के महल जैसा देखकर पूरी तरह हैरान रह गई। उसे कमरे में मौजूद उस लड़की को देखकर और भी हैरानी हुई जो जानी-पहचानी लग रही थी। आखिरकार प्राची ने मुझे उससे 'प्रथा' के तौर पर मिलवाया और उसे उस काम के बारे में बताया जो वह निशा से करवाना चाहती थी। प्राची चाहती थी कि निशा और बाद में तमन्ना कॉलेज में भी मेरे अंदर के नारीत्व (feminine side) को बाहर लाने में मेरी मदद करें।
जब तमन्ना आई, तो वह भी उतनी ही, बल्कि उससे भी ज़्यादा हैरान थी। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसकी दोस्त लड़की बन गई है। मुझे, निशा और प्राची को उसे समझाने-मनाने में एक-दो घंटे लग गए। प्राची ने तमन्ना को लड़की के रूप में मेरी खींची गई तस्वीरें दिखाईं और उसे लड़की बनकर मेरी खुशी देखने को कहा। आखिरकार तमन्ना मान गई और यह तय हुआ कि वे कॉलेज में मेरी मदद करेंगी और मुझे ज़रूरी बातें सिखाएँगी। दोस्तों की सहमति देखकर मैं बहुत खुश थी और अपनी नई ज़िंदगी के लिए तैयार थी।
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