शादी का दिन — आगे की कहानी
मैंने नारियल को दोनों हाथों से संभाला और धीरे-धीरे वेडिंग हॉल की ओर बढ़ने लगा। साड़ी का पल्लू बार-बार कंधे से खिसक रहा था, इसलिए मैं उसे ठीक करता हुआ चल रहा था। पीछे से प्रिया की हँसी सुनाई दे रही थी।
प्रिया: अरे विनीत, इतनी घबराहट क्यों? आज तो तुम हमारी सबसे खास विद्या हो!
मैंने पलटकर उसे घूरा।
मैं: प्रिया, अगर तुमने एक बार और ऐसा कहा, तो मैं यह नारियल तुम्हें पकड़ा दूँगा।
प्रिया: अच्छा बाबा, नहीं कहूँगी। लेकिन मुस्कुराओ तो सही!
तभी रोहिणी आंटी की आवाज़ आई।
रोहिणी: अरे, मेरी विद्या को परेशान मत करो! विनीत, इधर आओ। तुम्हें देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है।
मैं उनके पास गया। उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखा और मुस्कुराईं।
रोहिणी: तुम्हें याद है, तुमने दो साल पहले क्या कहा था?
मैं: हाँ आंटी... और अब लगता है कि वह शर्त मेरे लिए बहुत बड़ी सीख बन गई है।
रोहिणी: बिल्कुल। लेकिन एक बात याद रखना—लड़कियाँ पढ़ाई में अच्छी नहीं होतीं, ऐसा कहना गलत था। और अपनी गलती मान लेना अच्छी बात है।
मैंने सिर झुका लिया।
मैं: सॉरी आंटी। अब मैं ऐसा कभी नहीं कहूँगा।
रोहिणी: तो फिर आज की सबसे बड़ी जीत तुम्हारी यही है।
प्रिया ने धीरे से मेरे कान में कहा—
प्रिया: देखा? मैंने कहा था न, आंटी बहुत प्यारी हैं।
मैंने उसे हल्की-सी कोहनी मारी।
मैं: हाँ, लेकिन तुम्हारी शरारत का हिसाब शाम को होगा!
हम सब हँस पड़े। फिर शादी की रस्में शुरू हुईं। मैं बाकी ब्राइड्समेड्स के साथ खड़ा रहा और जब भी कोई रस्म होती, प्रिया मुझे धीरे से समझा देती।
कुछ देर बाद रोहिणी आंटी ने मुझे पास बुलाया।
रोहिणी: विनीत, तुम्हारे लिए एक सरप्राइज़ है।
उन्होंने एक लिफाफा मेरी ओर बढ़ाया। मैंने खोला तो उसमें विदेश यात्रा के टिकट थे।
मैं: आंटी! आपने सच में...?
रोहिणी: हाँ। तुमने मेहनत की है, और तुम इसके हकदार हो। लेकिन अगली बार किसी चुनौती में शर्त लगाने से पहले सोच लेना।
मैंने टिकट हाथ में लिए और मुस्कुराया।
मैं: पक्का आंटी। और इस बार मैं अपनी मेहनत से जीतूँगा।
प्रिया ने पीछे से आवाज़ लगाई—
प्रिया: विद्या! फोटो के लिए आओ!
मैंने उसकी तरफ देखा और हँसते हुए बोला—
मैं: आ रहा हूँ, प्रिया। लेकिन अब से मुझे विनीत ही कहना!
सब हँस पड़े। रोहिणी आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा और हम सब साथ में फोटो खिंचवाने लगे। उस दिन मुझे समझ आया कि परिवार की शरारतें कभी-कभी हमें शर्मिंदा कर सकती हैं, लेकिन सच्चे रिश्ते हमें अपनी गलतियों से सीखना भी सिखाते हैं।
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