शादी का दिन
फोटो खिंचवाने के बाद मैं थोड़ा सहज हुआ ही था कि प्रिया ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
प्रिया: चलो, अब अगली रस्म की तैयारी करनी है। और हाँ, आज तुम हमारी विद्या हो, तो मुस्कुराना पड़ेगा!
मैं: प्रिया, तुमने मेरा नाम बदलने की कसम खा रखी है क्या?
प्रिया: नहीं, बस आज तुम्हें चिढ़ाने का मौका मिला है!
हम दोनों हँसते हुए हॉल के अंदर गए। रोहिणी आंटी अपनी सहेलियों के साथ बैठी थीं। उन्होंने मुझे देखते ही बुलाया।
रोहिणी: विनीत, इधर आओ। तुम्हें एक काम देना है।
मैं: जी आंटी?
रोहिणी: आज तुम मेरी तरफ से एक छोटा-सा भाषण दोगे।
मैं घबरा गया।
मैं: मैं? लेकिन मुझे तो कुछ बोलना ही नहीं आता!
रोहिणी: आता है। बस दिल से बोलना।
प्रिया ने तुरंत मेरा हाथ दबाया।
प्रिया: हाँ, विद्या, अब देखना सब तुम्हारी तारीफ करेंगे।
मैंने उसे घूरा, लेकिन इस बार हँसी रोक नहीं पाया।
कुछ देर बाद जब सब मेहमान इकट्ठा हो गए, तो रोहिणी आंटी ने मुझे माइक पकड़ा दिया। मैंने सामने देखा—मम्मी, प्रिया, बाकी आंटियाँ और मेरी सारी कज़िन्स मुझे देख रही थीं।
मैं: नमस्ते सबको। आज मेरी सबसे छोटी आंटी रोहिणी की शादी है। वह मुझसे सिर्फ़ आठ साल बड़ी हैं, लेकिन मेरे लिए हमेशा एक बड़ी बहन जैसी रही हैं।
रोहिणी आंटी मुस्कुराईं।
मैं: बचपन में हम बहुत खेलते थे। और दो साल पहले मैंने उनसे एक शर्त लगाई थी। मैंने कहा था कि लड़कियाँ पढ़ाई में अच्छी नहीं होतीं। आज मुझे समझ आता है कि वह बात कितनी गलत थी।
हॉल में कुछ लोग मुस्कुराए, लेकिन इस बार किसी ने मेरा मज़ाक नहीं उड़ाया।
मैं: आंटी ने मुझे चुनौती दी, और मैंने उसे स्वीकार किया। लेकिन असली सीख यह है कि किसी की काबिलियत को उसके लड़का या लड़की होने से नहीं आँकना चाहिए।
रोहिणी आंटी की आँखों में हल्की नमी आ गई।
मैं: आंटी, आपने मुझे हमेशा निडर बनना सिखाया है। आज मैं आपको बस इतना कहना चाहता हूँ कि आप हमेशा खुश रहें। और हाँ, विदेश यात्रा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!
सबने तालियाँ बजाईं।
प्रिया मेरे पास आई और धीरे से बोली—
प्रिया: देखा? मैंने कहा था न, तुम बहुत अच्छा बोलोगे।
मैं: हाँ, लेकिन तुम्हारी शरारत मैं अभी नहीं भूला हूँ।
प्रिया: अच्छा, तो शाम को हिसाब कर लेना!
तभी रोहिणी आंटी ने हमें पास बुलाया।
रोहिणी: तुम दोनों की दोस्ती देखकर मुझे बहुत खुशी होती है। लेकिन विनीत, एक बात याद रखना—मज़ाक अपनी जगह है, पर किसी की इज़्ज़त हमेशा सबसे ज़रूरी है।
मैंने सिर हिलाया।
मैं: जी आंटी। और अब मैं किसी को उसकी पढ़ाई या काबिलियत के बारे में ऐसा नहीं कहूँगा।
रोहिणी आंटी ने मुझे गले लगा लिया।
रोहिणी: बस, यही मेरा सबसे अच्छा तोहफ़ा है।
शाम को जब शादी की रस्में पूरी होने लगीं, तो प्रिया ने मुझे फिर से बुलाया।
प्रिया: विनीत, अब आख़िरी फोटो! इस बार बिना नारियल के!
मैं हँस पड़ा।
मैं: ठीक है, लेकिन इस बार फोटो में मेरा नाम सही लिखना।
प्रिया: पक्का, विनीत!
हम दोनों फोटो खिंचवाने लगे। रोहिणी आंटी ने पीछे से कहा—
रोहिणी: अरे, मेरी विद्या को भी बीच में खड़ा करो!
मैंने आँखें बंद कर लीं और सब हँस पड़े।
उस दिन मुझे समझ आया कि परिवार की शरारतें कभी-कभी हमें शर्मिंदा कर सकती हैं, लेकिन सच्चे रिश्ते हमें अपनी गलतियों से सीखना भी सिखाते हैं। और रोहिणी आंटी की शादी मेरे लिए सिर्फ़ एक शादी नहीं, बल्कि एक ऐसी याद बन गई जिसे मैं हमेशा मुस्कुराकर याद करूँगा।
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