उसी पल बाहर से रिया की आवाज़ आई, “माँ जी! आपके लिए गरम दूध लाई हूँ!”
रिया कमरे में घुस आई। शांति देवी ने हाथ छोड़ दिया।
सागर ने राहत की साँस ली और पीछे हट गया।
रात अभी बाकी थी। और सुबह तक सागर को ‘अमिता’ बने रहना था।
क्या कल सुबह तक भंडा फूटेगा? या शांति देवी वाकई सागर को अपनी भावी बहू समझने लगेंगी?
रात गहरी हो चुकी थी। शांति देवी ने अमिता (सागर) को अपने कमरे में बैठा रखा था। गिलास का पानी पीने के बाद भी उन्होंने हाथ नहीं छोड़ा।
“बिटिया, तुम सच में घर की शोभा बढ़ाने वाली लड़की लगती हो,” शांति देवी ने प्यार से सागर के हाथ को सहलाते हुए कहा। “राकेश की माँ—मेरी छोटी ननद—आजकल बहू ढूँढने में परेशान है। तुम जैसी सुशील, साड़ी पहनने वाली और बात करने में नज़ाकत वाली लड़की मिल जाए तो घर का भाग्य चमक जाए।”
सागर ने पल्लू को और कस लिया। आवाज़ जितनी पतली हो सकती थी, उतनी करके बोला, “माँ जी… मैंने पहले ही कहा… मेरे घर में बात चल रही है…”
शांति देवी ने हाथ हिलाया। “चल रही है तो क्या हुआ? जब तक कुंडली नहीं मिलती और रिश्ता पक्का नहीं होता, तब तक कुछ भी हो सकता है। तुम राकेश से मिल लो। कल सुबह मैं उसे यहाँ बुला लेती हूँ। तुम दोनों आमने-सामने बात कर लो। अगर तुम्हें पसंद आ गया तो मैं तुम्हारे घर वालों से बात करवा दूँगी।”
सागर की आँखें फटी रह गईं। “कल… सुबह… यहाँ?”
“हाँ। राकेश लखनऊ में ही रहता है। आधे घंटे में पहुँच जाएगा। मैं अभी मैसेज कर देती हूँ।”
शांति देवी ने फोन उठाया और टाइप करने लगीं। सागर ने घबराकर रिया की तरफ देखा, जो दरवाज़े के पास खड़ी थी। रिया ने सिर हिलाया—‘रोको इसे!’
सागर ने हिम्मत करके कहा, “माँ जी… प्लीज़… इतनी जल्दी मत कीजिए। मेरी… मेरी मम्मी को बुखार है। मैं घर नहीं जा सकती अभी। और… और मेरी शादी की बात बहुत आगे बढ़ चुकी है। लड़के वाले अगले हफ्ते आने वाले हैं।”
शांति देवी ने फोन नीचे रखा। आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
“अगले हफ्ते? तो और भी जल्दी करना पड़ेगा। देखो बिटिया, मैं तुम्हें बुरी नहीं लग रही न? तुम मेरी जैसी सास पाओगी। मैं बहू को बहुत प्यार करती हूँ। रिया को भी देख लो—मैं कितना ख्याल रखती हूँ।”
रिया ने मुँह बना लिया, लेकिन चुप रही।
शांति देवी ने फैसला सुना दिया, “ठीक है। कल सुबह राकेश को नहीं बुलाऊँगी। लेकिन मैं तुम्हारे घर वालों से बात करूँगी। तुम मुझे अपने पापा या मम्मी का नंबर दो। मैं खुद बात करूँगी। अगर रिश्ता पक्का नहीं हुआ है तो मैं राकेश का प्रस्ताव रख दूँगी।”
सागर का दिमाग घूम गया। नंबर? कौन सा नंबर दे? स्वाति का? अपनी माँ का? या कोई फर्जी?
उसने जल्दी से कहा, “माँ जी… मेरे पापा का फोन खराब है। और मम्मी तो बीमार हैं, बात नहीं कर सकतीं। बाद में…”
“बाद में नहीं,” शांति देवी ने सख्ती से कहा। “तुम रिया से कह दो, वो तुम्हारे घर वालों का नंबर निकाल ले। या तुम खुद लिखकर दे दो। सुबह तक मुझे नंबर चाहिए।”
सागर ने घबराकर सिर हिलाया। “जी… जी माँ जी।”
शांति देवी संतुष्ट होकर लेट गईं। “अच्छा, अब जाओ सो जाओ। सुबह जल्दी उठना। मैं तुम्हारे लिए पूजा भी करवाऊँगी। राकेश वाली बात आगे बढ़ानी है।”
सागर कमरे से निकला तो रिया ने उसे खींचकर किचन में ले गई।
“सागर जी… अब क्या होगा?” रिया फुसफुसाई। “वो नंबर माँग रही हैं! और कल तक रिश्ता पक्का करने की बात कर रही हैं!”
सागर ने साड़ी का पल्लू फेंक दिया और अपनी असली आवाज़ में गुर्राया, “रिया, तुम्हारी सास मुझे अपनी भावी बहू बनाने पर तुली हुई हैं। अब अगर मैं नंबर नहीं दिया तो शक होगा। और दिया तो… स्वाति का नंबर दूँ? या अपनी माँ का? दोनों ही हालत में मौत पक्की है!”
रिया ने सिर पकड़ लिया। “मेरी सास बहुत जिद्दी हैं। एक बार कुछ ठान लें तो नहीं मानतीं। और राकेश भी… वो सीधा-सादा है, लेकिन अगर कल वो यहाँ आ गया और पास से देखा तो…”
सागर ने आईने में अपनी शक्ल देखी—लंबे बाल, बिंदी, साड़ी, औरत वाली चाल। खुद को देखकर भी यकीन नहीं हो रहा था।
“एक रात और,” सागर ने दाँत पीसते हुए कहा। “सुबह तक किसी तरह टालना है। अगर जरूरत पड़ी तो मैं बीमार पड़ जाऊँगा। बुखार, उल्टी, कुछ भी।”
रिया ने हामी भरी। “ठीक है। आप कमरे में सो जाइए। मैं सोफे पर। और अगर माँ जी फिर बुलाएँ तो मैं कह दूँगी कि आपको नींद की गोली लेनी पड़ी।”
दोनों बिस्तर पर गए। लेकिन नींद किसे आ रही थी?
रात के दो बजे अचानक शांति देवी का फोन बजा। उन्होंने उठाया। सामने वाली तरफ से किसी औरत की आवाज़ आई।
“दीदी… मैं राकेश की माँ बोल रही हूँ। तुमने अमिता के बारे में मैसेज किया था न? कैसी है लड़की? फोटो भेजो तो सही।”
शांति देवी ने तुरंत कमरे का दरवाज़ा खोला और सागर को जगाया।
“अमिता बिटिया, उठो! राकेश की माँ फोन पर हैं। वो तुम्हारी फोटो माँग रही हैं। ज़रा मुस्कुराकर खड़ी हो जाओ, मैं फोटो खींचती हूँ।”
सागर की नींद एकदम उड़ गई। फोटो? अब फोटो भी?
उसने पल्लू ठीक किया, आँखें रगड़ीं और बहुत अनमने अंदाज़ में खड़ा हो गया। शांति देवी ने तीन-चार फोटो खींच लीं और भेज दीं।
फोन पर दूसरी तरफ से आवाज़ आई, “दीदी… लड़की तो बहुत अच्छी है। चेहरा भी सुंदर है। बात आगे बढ़ाओ। कल ही राकेश को भेज देती हूँ मिलने।”
शांति देवी ने खुश होकर कहा, “ठीक है। कल सुबह भेज देना।”
कॉल कट होते ही सागर ने रिया की तरफ देखा। दोनों की आँखों में एक ही बात थी—
अब तो रिश्ता लगभग पक्का होने जा रहा था।
और सुबह… राकेश खुद आने वाला था।
सागर ने मन ही मन सोचा, “स्वाति… अगर तुझे पता चला कि तेरा पति किसी और की भावी बहू बनने जा रहा है… तो तू मुझे मार ही डालेगी।”
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