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अन्धकार

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Part 11

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आर्या के हाथ में वह तस्वीर काँप रही थी।

तस्वीर में तीन लोग थे—आर्या, सोनू और राज।

लेकिन सबसे विचित्र बात तस्वीर की तारीख थी।

अगले महीने की।

राज ने तस्वीर को ध्यान से देखा।

“अगर ये तस्वीर अभी ली ही नहीं गई, तो इसमें हम तीनों कैसे हैं?”

सोनू कुछ देर चुप रहा।

फिर उसने कहा,

“शायद क्योंकि अन्धकार सिर्फ पिछली जिंदगी की यादें नहीं दिखाता।”

आर्या ने उसकी ओर देखा।

“तुम्हें इसके बारे में कुछ पता है?”

सोनू ने धीरे से सिर हिलाया।

“बहुत थोड़ा। पिछले जन्म में मैं तुम्हारा दोस्त था। इस जन्म में मैं तुम्हारा भाई हूँ। लेकिन कुछ चीजें दोनों जन्मों के बीच भी मेरे साथ चली आई हैं।”

आर्या ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“तुम मेरे भाई हो। यह रिश्ता मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन मैं जानना चाहती हूँ कि उस तस्वीर में राज क्यों है।”

राज ने आर्या की ओर देखा।

“शायद इसका जवाब हमें साथ मिलकर ढूँढना होगा।”

आर्या मुस्कुराई।

“साथ?”

“हमेशा।”

उस एक शब्द ने आर्या को भीतर तक छू लिया।

अन्धकार ने उसकी पहचान बदल दी थी, उसके अतीत के दरवाज़े खोल दिए थे और उसके सामने भविष्य की तस्वीर रख दी थी। लेकिन राज का साथ उसे स्थिर रख रहा था।

सोनू ने दोनों को देखा और मुस्कुराया।

“तो अब हमारी टीम पूरी है।”

आर्या ने पूछा, “और तस्वीर?”

सोनू ने तस्वीर को पलट दिया।

पीछे केवल एक पंक्ति थी—

“अगले महीने की पूर्णिमा को तीनों फिर अन्धकार में लौटेंगे।”

राज ने तुरंत कहा,

“हम वहाँ नहीं जाएँगे।”

आर्या ने उसकी तरफ देखा।

“अगर नहीं गए तो?”

सोनू ने जवाब दिया,

“तो शायद तस्वीर में जो होना है, वह बदल जाएगा।”

आर्या ने तस्वीर को सीने से लगा लिया।

“तो हमें तय करना होगा कि हम भविष्य से भागेंगे... या उसका सच जानेंगे।”

राज ने उसका हाथ थाम लिया।

“इस बार फैसला तुम अकेले नहीं करोगी।”

आर्या की आँखों में हल्की मुस्कान आ गई।

“ठीक है। हम तीनों साथ चलेंगे।”

सोनू ने तुरंत कहा,

“लेकिन एक बात याद रखना—मैं इस बार तुम्हारा दोस्त नहीं हूँ।”

आर्या ने मुस्कुराकर उसके सिर पर हाथ रखा।

“मुझे पता है।”

सोनू ने कहा,

“मैं तुम्हारा भाई हूँ। और भाई अपनी बहन को अन्धकार में अकेले नहीं जाने देता।”

तीनों ने तस्वीर की ओर देखा।

उसमें दिखाई दे रहा भविष्य अब उन्हें बुला रहा था।

और इस बार—

अन्धकार की नायिका आर्या अकेली नहीं थी।
अन्धकार से बाहर आने के बाद राज और आर्या के बीच बहुत कुछ बदल चुका था।

पहले वे दोस्त थे।

अब राज आर्या के साथ सिर्फ उसके बदले हुए रूप की वजह से नहीं था। उसने उस डर, उलझन और अकेलेपन को देखा था जिससे आर्या गुज़री थी—और उसे समझ आया था कि उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ उसका रूप नहीं, बल्कि यह भरोसा था कि कोई उसे बिना शर्त स्वीकार करता है।

एक शाम दोनों छत पर बैठे थे।

आर्या चुपचाप आसमान देख रही थी।

राज ने पूछा, “क्या सोच रही हो?”

“इस बारे में कि मेरी जिंदगी कितनी अचानक बदल गई।”

“तुम्हें अपने पुराने जीवन की याद आती है?”

आर्या ने कुछ देर सोचा।

“हाँ। सागर की यादें मेरी ही यादें हैं। मैं उन्हें मिटाना नहीं चाहती। लेकिन अब जब मैं खुद को आर्या मानती हूँ, तो मुझे लगता है कि पहली बार मैं अपने बारे में पूरी सच्चाई जानती हूँ।”

राज ने कहा, “और तुम्हें डर नहीं लगता?”

आर्या ने उसकी ओर देखा।

“पहले लगता था। अब कम लगता है।”

“क्यों?”

आर्या मुस्कुराई।

“क्योंकि तुम मेरे साथ हो।”

राज कुछ पल चुप रहा।

फिर उसने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।

“मैं तुम्हें इसलिए नहीं चाहता कि अन्धकार ने तुम्हें बदल दिया। मैं तुम्हें इसलिए चाहता हूँ क्योंकि तुम्हारे साथ रहने पर मुझे लगता है कि मैं अपने सबसे अच्छे रूप में हूँ।”

आर्या की आँखें नम हो गईं।

“राज, अगर एक दिन अन्धकार ने मुझे फिर बदल दिया तो?”

राज ने उसका हाथ और मजबूती से थाम लिया।

“तो मैं फिर तुम्हारे साथ खड़ा रहूँगा।”

“और अगर मेरी पुरानी यादें वापस आ गईं?”

“तब हम उन्हें साथ समझेंगे।”

“और अगर मुझे खुद नहीं पता कि मैं कौन हूँ?”

राज मुस्कुराया।

“तब तक मैं तुम्हें याद दिलाता रहूँगा कि तुम कौन हो।”

आर्या ने अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया।

उस पल दोनों के बीच कोई रहस्य नहीं था, कोई फिल्म नहीं थी और न ही अन्धकार का डर।

सिर्फ दो लोग थे, जिन्होंने बदलती परिस्थितियों के बावजूद एक-दूसरे को चुनना सीखा था।

कुछ देर बाद आर्या ने धीरे से कहा—

“राज... मैं तुमसे प्यार करती हूँ।”

राज ने उसकी ओर देखा।

“मुझे पता था।”

आर्या ने हँसते हुए उसके कंधे पर हल्की-सी थपकी दी।

“इतना आत्मविश्वास?”

“नहीं,” राज ने मुस्कुराकर कहा, “बस उम्मीद थी।”

दोनों हँस पड़े।

लेकिन कमरे के अंदर रखी पुरानी तस्वीर पर अचानक नीली रोशनी चमकी।

उनकी हँसी रुक गई।

तस्वीर में आर्या और राज पहले से कुछ अधिक करीब दिखाई दे रहे थे।

और नीचे एक नई पंक्ति उभर रही थी—

“जिस प्रेम को अन्धकार स्वीकार कर ले, उसे समय भी अलग नहीं कर सकता।”

आर्या ने राज की ओर देखा।

राज ने उसका हाथ पकड़ लिया।

दोनों जानते थे कि उनकी कहानी अभी आसान नहीं होने वाली थी।

लेकिन अब वे उसे साथ मिलकर जीने वाले थे।

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