राज ने तस्वीर को फिर से गौर से देखा।
“अगर आर्या और सागर एक ही व्यक्ति हैं, तो तीस साल पुरानी तस्वीर का मतलब क्या है?”
वृद्ध व्यक्ति कुछ क्षण चुप रहा।
“तस्वीर को सामान्य समय के हिसाब से मत देखो। अन्धकार थिएटर में समय सीधा नहीं चलता।”
उसने तस्वीर के पीछे लिखा एक वाक्य दिखाया—
“जो यहाँ अपनी पहचान पाता है, उसकी तस्वीर समय से पहले दिखाई दे सकती है।”
राज और सागर एक-दूसरे को देखने लगे।
इसका मतलब यह था कि तस्वीर में दिखाई देने वाली आर्या किसी दूसरी महिला की तस्वीर नहीं थी। वह सागर की ही आर्या-पहचान का भविष्य से अतीत में पहुँचा हुआ संकेत थी।
लेकिन उस तस्वीर में राज भी था।
अब राज का सवाल और बड़ा था।
“मैं वहाँ क्यों था?”
वृद्ध व्यक्ति ने मुस्कुराकर कहा,
“क्योंकि अन्धकार की कहानी में तुम्हारी भूमिका भी पहले से तय थी।”
आर्या और राज
अगले कुछ दिनों में राज सागर के साथ हुई घटना को समझने की कोशिश करता रहा। लेकिन उसके लिए सबसे बड़ा बदलाव यह था कि अब वह सागर को केवल अपने पुराने दोस्त के रूप में नहीं देख पा रहा था।
आर्या के रूप में सागर से बातचीत करते हुए उसे महसूस हुआ कि उनके बीच वही दोस्ती, वही भरोसा और वही पुरानी समझ मौजूद थी—लेकिन उसके भीतर भावनाएँ धीरे-धीरे बदल रही थीं।
एक शाम राज ने आर्या से कहा—
“मुझे नहीं पता अन्धकार ने तुम्हारे साथ क्या किया है। लेकिन एक बात पता है—तुम जो भी हो, मैं तुम्हें तुम्हारी पहचान की वजह से नहीं, बल्कि तुम्हारे व्यक्तित्व की वजह से चाहता हूँ।”
आर्या ने कुछ देर चुप रहकर उसका हाथ थाम लिया।
“और मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे किसी रहस्य की तरह नहीं, बल्कि अपने बराबर के इंसान की तरह देखो।”
उनका रिश्ता धीरे-धीरे प्रेम में बदल गया।
समय बीतता गया और अन्धकार का रहस्य उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया। अंततः राज और आर्या ने विवाह करने का निर्णय लिया।
विवाह के दिन आर्या ने वही पुरानी तस्वीर अपने साथ रखी।
राज ने तस्वीर देखते हुए कहा,
“अब समझ आया कि वह तस्वीर क्यों थी।”
आर्या मुस्कुराई।
“क्यों?”
“क्योंकि वह हमारे अतीत की तस्वीर नहीं थी।”
आर्या ने पूछा, “तो?”
राज ने उसका हाथ थाम लिया।
“वह हमारे भविष्य का वादा थी।”
दोनों ने विवाह कर लिया।
और विवाह के बाद भी वह तस्वीर उनके घर में सुरक्षित रही।
कई वर्षों बाद जब आर्या ने उसे फिर देखा, तो तस्वीर में एक नया बदलाव दिखाई दिया।
पहले उसमें केवल आर्या और राज थे।
अब उनके पीछे “अन्धकार” थिएटर का दरवाज़ा भी खुला हुआ था।
Discussion (0)