सागर और राज दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। वे हमेशा एक-दूसरे की बहुत कद्र करते थे। हॉस्टल की ज़िंदगी भी बहुत अच्छी चल रही थी, हँसी-मज़ाक और दोस्ती के बीच उनके दिन आराम से बीत रहे थे। लेकिन उनकी यह खुशनुमा ज़िंदगी तब बदल गई, जब एक दिन राज के घर से एक संदेश आया। राज बेटा, जल्दी घर आ जाओ। हमने तुम्हारे लिए एक रिश्ता भी देखा है। तुम आकर लड़की से बात कर लो और अगर तुम्हें लड़की पसंद आए, तो आगे की बात करेंगे। राज ने सागर से कहा, “भाई, मुझे अभी शादी नहीं करनी है। लेकिन माँ हैं कि मुझे शादी के बंधन में बाँधना चाहती हैं। मैं समझ नहीं पा रहा कि उन्हें कैसे समझाऊँ।” सागर ने पूछा, “फिर तुम क्या चाहते हो, राज? आखिर तुम्हारे मन में क्या है?” राज ने कहा, “सागर, एक रास्ता है। क्यों न तुम मेरी पत्नी बनकर मेरे घर चलो और मेरे साथ रहो?” सागर ने हैरानी से कहा, “क्या? लेकिन मैं क्यों?” राज ने समझाते हुए कहा, “क्योंकि तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो। वैसे भी तुमने कॉलेज के ड्रामा में लड़की का किरदार निभाया था और उसमें पहला पुरस्कार भी जीता था। इसलिए मेरी मदद सिर्फ तुम ही कर सकते हो।” सागर ने झिझकते हुए कहा, “पर भाई, मैं लड़का हूँ!” आखिरकार सागर को राज की बात माननी पड़ी और वह राज की पत्नी बनकर उसके घर जाने के लिए तैयार हो गया। आखिरकार सागर को राज की बात माननी पड़ी। उसने दोस्ती के खातिर राज की मदद करने का फैसला किया। अब सागर राज की पत्नी बनकर उसके घर जाने के लिए तैयार हो गया था। दोनों ने तय किया कि यह सिर्फ कुछ समय के लिए किया गया एक नाटक होगा, ताकि राज अपनी माँ को शादी के लिए मना सके। राज ने खुद को महिला के रूप में तैयार किया। उसने लंबे बालों वाली विग पहनी और सिलिकॉन पैड की मदद से अपने शरीर का आकार महिलाओं जैसा बनाया। चेहरे के अनचाहे बाल हटाने के लिए उसने लेज़र ट्रीटमेंट भी करवाया, जिससे उसका चेहरा काफी हद तक स्त्रियों जैसा दिखाई देने लगा। इसके बाद उसने कुछ महिलाओं के कपड़े और ज़रूरी सामान खरीदे। अब आईने में देखकर उसे खुद भी यकीन नहीं हो रहा था कि वह इतना बदल गया है। एक सुहागन के रूप में सागर बिल्कुल एक महिला जैसा दिखाई दे रहा था। राज ने उसके नए रूप को देखकर उसका नाम विद्या रख दिया। अब से उसे राज के घर में विद्या बनकर ही रहना था, ताकि राज की माँ को इस पूरे नाटक पर कोई शक न हो। विद्या ने अपनी आवाज़ को भी स्पीच थेरेपी की मदद से महिलाओं जैसी बना लिया, ताकि किसी को उसके असली रूप के बारे में शक न हो। उसने कान छिदवाकर सुंदर ईयररिंग्स पहनीं और नाक में नोज़-पिन भी पहन ली। हाथों में चूड़ियाँ सजाईं, माँग में सिंदूर भरा और माथे पर बिंदी लगाई। अब विद्या एक सुंदर और सजी-धजी सुहागन महिला के रूप में बिल्कुल तैयार थी। राज के घर पहुँचते ही उसकी माँ सुमित्रा ने राज के साथ एक लड़की को देखा। वह हैरानी से बोलीं, “राज बेटा, ये कौन है?” राज ने मुस्कुराते हुए कहा, “माँ, ये विद्या है। हम दोनों साथ पढ़ते थे और मुझे ये पसंद आ गई थी। हमने शादी कर ली। अब ये आपकी बहू है।” सुमित्रा ने विद्या की ओर देखा। विद्या ने झुककर उनके पैर छुए। सुमित्रा ने उसे आशीर्वाद देते हुए कहा, “खुश रहो बेटी। आज से तुम इस घर की बहू हो।”
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