पहली घूँट — आवाज़
सागर ने पहली बार ड्रिंक की एक छोटी-सी sip ली। गले से उतरते ही उसे हल्की गर्माहट महसूस हुई। उसने राज से कुछ कहने के लिए मुँह खोला, लेकिन अपनी ही आवाज़ सुनकर चौंक गया।
“राज... मेरी आवाज़ को क्या हुआ?”
उसकी भारी आवाज़ अब मुलायम और स्त्रैण हो चुकी थी।
राज ने ध्यान से उसे देखा।
“आवाज़ बदल गई है। लेकिन बाकी सब अभी वैसा ही है।”
सागर ने राहत की साँस ली। शायद असर यहीं तक हो।
लेकिन गिलास में अभी काफी ड्रिंक बाकी थी।
दूसरी घूँट — चेहरे की शुरुआत
कुछ मिनट बाद सागर ने दूसरी sip ली।
इस बार वही गर्माहट गले से ऊपर की ओर बढ़ी और चेहरे तक पहुँच गई। उसे अपने जबड़े के आसपास हल्का खिंचाव महसूस हुआ।
शीशे में देखते ही उसे बदलाव दिखाई दिया—उसके चेहरे की कठोर रेखाएँ धीरे-धीरे नरम हो रही थीं।
राज ने कहा,
“अब चेहरे पर भी असर शुरू हो गया है।”
सागर ने अपने गाल और जबड़े को छुआ।
“तो हर घूँट पिछली वाली से आगे का बदलाव कर रही है...”
तीसरी घूँट — चेहरे से बालों तक
तीसरी sip लेते ही चेहरे का परिवर्तन थोड़ा और स्पष्ट हो गया। अब उसकी भौंहें और चेहरे की रेखाएँ अधिक स्त्रैण दिखाई दे रही थीं।
इसके तुरंत बाद उसके सिर में हल्की सनसनाहट हुई।
उसने बालों को छुआ।
जो बाल पहले केवल लड़की के गेटअप का हिस्सा थे, उनके नीचे से उसके वास्तविक बाल तेजी से बढ़ने लगे। वे धीरे-धीरे उसके कानों और फिर कंधों तक पहुँच गए।
सागर ने हैरानी से कहा,
“अब बदलाव चेहरे से आगे बढ़ गया है।”
चौथी घूँट — शरीर की बनावट
चौथी sip के बाद असर पहली बार उसके पूरे शरीर में महसूस हुआ।
उसके कंधों की चौड़ाई धीरे-धीरे कम होने लगी और कमर की बनावट बदलने लगी। उसके कपड़े भी उसके बदलते शरीर पर अलग तरह से बैठने लगे।
सागर ने कुर्सी पकड़ ली।
“राज... अब ये सिर्फ चेहरा या बाल नहीं हैं।”
राज ने गंभीर होकर जवाब दिया,
“मुझे पता है। बदलाव अब पूरे शरीर तक पहुँच चुका है।”
पाँचवीं घूँट — बाहरी रूप का पूरा होना
पाँचवीं sip के साथ बदलाव और आगे बढ़ा।
उसके हाथों और पैरों की बनावट धीरे-धीरे अधिक नाज़ुक होने लगी। चेहरे, बालों और शरीर में पहले से हुए परिवर्तन अब एक-दूसरे के साथ मिलकर उसके पूरे बाहरी रूप को बदल रहे थे।
सागर ने कुछ कदम चलकर खुद को देखा।
उसकी आवाज़ पहले ही बदल चुकी थी, चेहरा और बाल भी बदल चुके थे, और अब उसका पूरा रूप उसके लड़की वाले गेटअप के साथ पूरी तरह मेल खाने लगा था।
सागर ने धीमे से कहा,
“अब कोई मुझे सिर्फ गेटअप में लड़का नहीं समझेगा।”
छठी घूँट — अंतिम परिवर्तन
गिलास में अब केवल आखिरी sip बची थी।
सागर कुछ देर तक उसे देखता रहा। पिछली पाँच घूँटों ने हर बार उसके बदलाव को एक कदम आगे बढ़ाया था।
उसने आखिरी sip ली।
इस बार कोई एक नया परिवर्तन नहीं हुआ। बल्कि पहले के सभी बदलाव जैसे एक साथ स्थिर हो गए—आवाज़, चेहरा, बाल और शरीर की बनावट अब एक ही रूप में आ गए।
सागर ने शीशे में खुद को देखा।
उसका गेटअप अब केवल गेटअप नहीं रह गया था।
राज ने धीमे से कहा,
“अब फिल्म देखने के लिए तुम्हें लड़की होने का नाटक करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।”
Discussion (0)