Mother · Hindi

Kiran to kaamini

In Progress | Part 3 of 7 | 0 Likes

Part 3

राजश्री ने बेटे की बात सुनने के बाद कई दिन सोचा। उसका मन अब भी उलझन में था, लेकिन एक माँ होने के नाते उसका प्यार ज़्यादा मज़बूत था।

एक शाम उसने किरण को पास बुलाया और बोली,
“किरण, मैं तुझे मना नहीं करूँगी। लेकिन सुन… ये सब सिर्फ़ घर के अंदर ही रहेगा। बाहर किसी को पता चला तो लोग हमें अपमानित करेंगे, ताने देंगे। मैं नहीं चाहती कि तुझे समाज की नज़रों में शर्मिंदगी झेलनी पड़े।”

किरण ने आँखों में चमक लिए धीरे से सिर हिला दिया।
“हाँ माँ, मैं वादा करता हूँ।”

धीरे-धीरे घर के भीतर किरण का रूप बदलने लगा। वह माँ की साड़ियाँ, सलवार, दुपट्टे पहनकर आईने के सामने संकोच से मुस्कुराने लगा। राजश्री उसे देखती तो उसके मन में अब भी अजीब-सा डर रहता, पर बेटे की खुशी देखकर उसके होठों पर हल्की मुस्कान आ जाती।

धीरे-धीरे किरण माँ की मदद भी करने लगा। कभी रसोई में सब्ज़ी काटता, कभी कपड़े तह करता, कभी माँ के साथ झाड़ू-पोछा कर देता। वह इन कामों को भी उसी सौम्यता से करता जैसे कोई लड़की करती।

राजश्री उसे देखते हुए सोचती, “ये रास्ता आसान नहीं होगा… पर अगर मेरा बेटा खुश है, तो मुझे उसके साथ खड़ा रहना ही होगा।”

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